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हर महीने दान में देना होगा 1 दिन का वेतन



उत्तराखंड के ढाई लाख सरकारी और अर्ध सरकारी कर्मचारियों को मौजूदा वित्तीय वर्ष तक हर माह एक दिन का वेतन कोरोना पर नियंत्रण के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में देना होगा। मुख्य सचिव से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इस दायरे में आएंगे। फैसले के कुछ देर बाद वित्त विभाग ने यह आदेश भी जारी कर दिया।

शुक्रवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया। लॉकडाउन के बाद आर्थिक संकट से जूझ रही सरकार ने कर्मचारियों के भत्तों में कटौती को लेकर लंबी चर्चा की, लेकिन इस पर सहमति नहीं बन पाई।

दायित्वधारियों का 5 दिन का मानदेय काटा जाएगा


कैबिनेट ने दायित्वधारियों के मानदेय में से हर महीने पांच दिन कटौती करने का भी निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री के सभी ओएसडी के वेतन से भी यह कटौती की जाएगी।

एक जून से एक घंटा ज्यादा खुलेंगे दफ्तर


उत्तराखंड में सभी सरकारी दफ्तर एक जून से सुबह दस से शाम पांच बजे तक खुलेंगे। दफ्तरों में अफसरों को अनिवार्य रूप से आना होगा। जबकि, समूह ग और घ के 50 प्रतिशत कर्मचारी ऑफिस आएंगे। अब तक चार बजे तक दफ्तर खोले जा रहे थे और 33 प्रतिशत कर्मचारी ऑफिस आ रहे थे। शुक्रवार को प्रभारी सचिव डा. पंकज कुमार पांडे ने यह आदेश किया। आदेश में अर्ध सरकारी दफ्तरों का कोई जिक्र नहीं है।

सचिवालय छह बजे होगा बंद


सचिवालय और विधानसभा के साथ ही ऐसे कार्यालय जहां हफ्ते में पांच दिन काम होता है। वे सुबह 9:30 बजे खुलेंगे और शाम छह बजे बाद बंद होंगे।

दुकानें शाम सात बजे तक खोलने का आदेश


उत्तराखंड में सभी व्यावसायिक व वाणिज्यीय प्रतिष्ठान (दुकानें) सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक खोलने का आदेश जारी कर दिया है।


भाजपा के हर विधायक का 30% वेतन कटेगा


कौशिक ने दावा किया कि भाजपा के हर विधायक के वेतन से भी 30 फीसदी की कटौती की जाएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायक कटौती के पक्ष में नहीं हैं तो नेता प्रतिपक्ष पत्र लिखकर विस अध्यक्ष को सूचित कर दें।


भत्तों में नहीं होगी कटौती


सरकारी प्रवक्ता व कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि, सरकार का भत्तों में कटौती का कोई इरादा नहीं है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन से यह कटौती नहीं की जाएगी।

इस खबर के बारे में एक व्यक्ति ने इसका जवाब में लिखा यह दान है या जबरदस्ती है


दान या मनमानी ?


एक वर्ष तक हर कार्मिक का एक हर माह एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में दिए जाने का निर्णय विचित्र है l इस बारे में मेरी व्यक्तिगत राय निम्नलिखित है -


1.बेहतर होता कि दान  देने वालों से उचित माध्यम द्वारा उनकी राय /सहमति ले ली जाती l फिलहाल तो यह यह जबरदस्ती दान हो गया ( जिसे छीनना भी कह सकते हैं ) l


2.यह भी बेहतर होता कि सरकार अपने खर्चों में कटौती का पूरा विवरण सार्वजनिक करती l


3. यह समझना मुश्किल है कि अभी जारी वित्तीय वर्ष के अधिकतर व्यय हो ही नहीं पाये है,  तो सरकार के पास वास्तव में कितना धन है, इसकी जानकारी दी जानी चाहिए l


4. कोरोना से निपटने के लिए अनुमानित व्यय कितना है, और अब तक इस मद में आय -व्यय का लेखा जोखा क्या है ? इसे भी  सार्वजनिक किया जाना चाहिए था l


5.  कोरोना के संदर्भ में केंद्र /अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों से कितना धन मिल चुका है, आगे कितना प्रस्तावित है, यह जानकारी भी दी जानी चाहिए थी l


6. क्या सरकार वित्तीय संकट में है ? यदि हाँ तो कितनी ? यदि नहीं तो ये आदेश क्यों ? यह स्पष्ट होना चाहिए था l


मुझे लगता है कि इस आदेश को अदालत में चुनौती दी जा सकती है, आज शाम तक साथियों एवं वकीलों से चर्चा कर अपनी राय सबके सामने रखूँगा l


फिलहाल, मैं दान देने के पक्ष में तो हूँ, पर जबरन दान के पक्ष में बिल्कुल नहीं l


(कोरोना से चिंतित व्यक्ति की हंसती हुई तस्वीर आपका स्वागत करती है )


मुकेश प्रसाद बहुगुणा



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